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सेवा संकल्प फाउंडेशन: जहां सेवा बनती है संस्कार और संस्कार बनते हैं पहचान

 

सेवा संकल्प फाउंडेशन: जहां सेवा बनती है संस्कार और संस्कार बनते हैं पहचान

 

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गुरुवार को सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव-2026 के शुभारम्भ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई एवं राज्यपाल द्वारा प्रदेश में विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 10 समाजसेवकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनमानस को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक आत्मा, सामूहिक चेतना और प्रकृति के साथ संतुलनपूर्ण जीवन-दृष्टि का प्रतीक है।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी सूर्य के उत्तरायण होने के साथ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, ऊर्जा और प्रकाश का संदेश देती है। यह पर्व समाज को निराशा से संकल्प की ओर तथा जड़ता से प्रगति की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने उत्तरायणी को ऋतु-चक्र आधारित वैज्ञानिक चेतना और प्रकृति के साथ सामंजस्य का सजीव उदाहरण बताया। उन्होंने उत्तराखण्ड की कौथिक (मेले) परम्परा को लोकजीवन की धड़कन बताते हुए कहा कि ये आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक निरंतरता और लोकस्मृति के जीवंत केंद्र रहे हैं। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और हस्तशिल्प उत्तराखण्ड की जीवंत, जाग्रत और गौरवशाली सांस्कृतिक परम्परा के प्रतीक हैं।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि नहीं, बल्कि राष्ट्र प्रथम की भावना से अनुप्राणित भूमि है। देवभूमि के वीर सपूतों ने सदैव राष्ट्र की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने विकसित भारत 2047 के संकल्प की चर्चा करते हुए कहा कि योग, आयुष, शिक्षा, पर्यटन, जैव विविधता, जल-स्रोत संरक्षण, रक्षा सेवाओं और मानव संसाधन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड देश को दिशा देने की क्षमता रखता है। राज्यपाल ने उत्तराखण्ड के लोगों की ईमानदारी, सादगी और कर्मठता को राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने स्वामी रामतीर्थ, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली, तीलू रौतेली, गौरा देवी, बछेंद्री पाल, राइफलमैन जसवंत सिंह रावत और जनरल बिपिन रावत जैसे महान व्यक्तित्वों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पण साधारण व्यक्ति को भी इतिहास निर्माता बना देता है।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव लोककला, लोकसंगीत, लोकनृत्य, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को नई पहचान देता है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को व्यवहारिक रूप से साकार करता है। उन्होंने युवाओं से नशे और व्यसनों से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा, खेल, कौशल और सेवा के माध्यम से ही सशक्त उत्तराखण्ड और सशक्त भारत का निर्माण संभव है।

राज्यपाल ने सेवा संकल्प फाउंडेशन के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृति तभी जीवित रहती है, जब वह सेवा, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ी हो। उन्होंने उत्तरायणी महोत्सव को उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय गौरव को नई ऊँचाइयाँ देने वाला बताया और सभी को शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर ट्रस्टी संस्थापक, सेवा संकल्प फाउंडेशन श्रीमती गीता धामी, प्रथम महिला श्रीमती गुरमीत कौर, कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, मेयर देहरादून श्री सौरभ थपलियाल, आईएमए कमांडेंट ले ज नागेन्द्र सिंह सहित विभिन्न दायित्वधारी एवं वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित रहे।

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